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रेड रोड

July 11, 2013

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- रेड रोड -

(सीन पहला)
रोहन - पापा कहते ही बडा नाम करेगा, बेटा हमारा ऐसा काम करेगा-----
मोहनदास - सिन्हा साहब आपका बेटा बडा होन्हार ही-
सिन्हा - हा सब, भगवान कि दया हे जो इतना समझदार बेटा मिला हे, मेरे रिटायर्ड होनेकेबाद रोहन ने हि तो सारे घर कि जिम्मेदारी संभाली
हे,अब तो बॉम्बे के बडे हॉस्पिटल मी मेरे आखोका ओपरेशन काराने वाला हे-
मोहनदास - हा यार ये तो सही कहा तुने, आजकल कहा ऐसे लडके होते हे, अच्छी कंपनी म नोकरी करता हे, पगार भी अच्छी ही, बाइक, कार, ये
शानदार flat ओर क्या चाहिये-
सिन्हा - हा मोहनदास, बस हमारे इस घर को किसीकी नझर न लगे- चलो इसी बातपर तुम्हे मसालेदार चाय पिलाते हे-
(सीन दुसरा )
प्रतिक - हाय रोहन क्या हुआ कैसा रहा तेरा सेमिनार,
रोहन - बोहत बढीया, सबसे अच्छा मेरा हि तो प्रेसेन्तेषण था, तुझे तो पत ही अपुन हर काम म न १ होते ही क्या-
प्रतिक - हा मेहे भाई पता हे, जहापणा तुसी ग्रेट हो, तोहफा कुबूल हो, (अबे चदडी उपर कर सीमा आ रही) कहा हे, तुभी ना-
रोहन - अरे मजाक कर रहा था, ए यार चल सिगरेट पिते हे,
प्रतिक - अबे ए तुझे पता नही
रोहन - क्या, क्या हुं, कोई मर गया क्या,
प्रतिक- नहि मारानेवला हे, तू क्यो कि सिगरेट इज इन्जुरीएड टू हेल्थ --- सिगरेट पिनेसे इन्सान मर जाता हे,
रोहन - अबे तेरी तो तुझे पत हे, मै कितने सालोंसे पी राहा हु, कुछ nahi हुं और आगे भी कुछ nahi होगा, चल एन्जोय ----
सीमा - (अरे हा मै पोहोंच राही हु, तुम लोग मम्मी को संभालो, ) अरे अच्छा हुंआ रोहन -
प्रतिक तुम लोग मिल गये मेरे पाप को इलेक्ट्रिक शोक लाग गया, मुझे जल्दी घर छोड दो प्लीज,
प्रतिक - अरे तुम टेन्शन मत लो, चलो बैठो जल्दी बाईक पर, रुको तुम एक काम करो रोहन के साथ जा, मै सतीश डॉक्टर को लेकर आता हून,

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